रावण की कहानी (Ravan ki kahani)

1.  रावण की मृत्यु
पौराणिक किस्से-कहानियों में अक्सर हम यही सुनते आए हैं कि रावण की मृत्यु का कारण उसका अपना भाई विभीषण था। विभीषण ने ही रावण की मृत्यु
का रहस्य राम को बताया था।

2.  आधी हकीकत
लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि ये इस कहानी की आधी हकीकत है। आधा भाग मंदोदरी से भी जुड़ा है, जिसके विषय में हम आपको बताने जा
रहे हैं।

3.  कड़ी तपस्या
ये बात तो हम जानते ही हैं रावण, कुंभकर्ण और विभीषण, तीनों ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कड़ी तपस्या की थी।

4.  ब्रह्मा जी
ब्रह्मा जी के प्रकट होने पर रावण ने उनसे अमरता का वरदान मांगा। लेकिन ब्रह्मा जी ने यह कहकर उस मांग को टाल दिया कि अमरता का वरदान देना
उनके लिए मुमकिन नहीं है। ये कहने के बाद ब्रह्मा जी ने रावण को एक तीर दिया और कहा “तुम्हारी मृत्यु इसी तीर से हो सकती है”।

5.  सिंहासन
रावण वह तीर लेकर अपने महल पहुंचा और वहां जाकर उसे अपने सिंहासन के पास खंबे में चुनवा दिया।

6.  राम और रावण का युद्ध
जब भगवान राम और रावण का युद्ध चल रहा था तब श्रीराम का हर बाण, रावण का वध करने में असफल होता जा रहा था। श्रीराम उसका सिर धड़ से
अलग करते और जैसे ही वह सिर जमीन पर गिरता दोबारा धड़ से जुड़ जाता।

7.  मंदोदरी
ऐसे में विभीषण ने राम को बताया कि उस विशिष्ट तीर के अलावा किसी भी अन्य शस्त्र से रावण की मृत्यु संभव नहीं है। लेकिन वह तीर कहां था, रावण ने
उसे कहां छिपा रखा था, कोई ये नहीं जानता था…. सिवाय मंदोदरी के।

READ  Why all leaders are readers ?

8.  ज्योतिषाचार्य
बस फिर क्या था, एक ज्योतिषाचार्य का रूप धरकर हनुमान जी लंका पहुंच गए। वे लंका के प्रसिद्ध स्थानों में घूम-घूमकर लोगों के भविष्य बताने लगे।
चारों ओर इस हनुमान रूपी ज्योतिष की खबर फैल गई।

9.  रावण से जुड़ी बातें
ये समाचार मंदोदरी तक भी पहुंचा। उत्सुकतावश मंदोदरी ने ज्योतिष को अपने महल बुलाया। महल पहुंचकर हनुमान के रूप में ज्योतिष ने मंदोदरी को
रावण से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताईं, जो स्वयं मंदोदरी भी नहीं जानती थी।

भगवान राम की अर्धांगिनी मां सीता का पंचवटी के पास लंकाधिपति रावण ने अपहरण करके 2 वर्ष तक अपनी कैद में रखा था। लेकिन इस कैद के दौरान रावण ने माता सीता को छुआ तक नहीं था। तो ऐसा क्या कारण था कि रावण ने सीता माता को छुआ तक नहीं? क्या माता सीता में सतीत्व की शक्ति थी या कि रावण डरता था भगवान राम से। कहीं ऐसा तो नहीं कि रावण ने कोई वचन धारण कर रखा हो या वह किसी शाप से बंधा हो?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.