झूला

झूला

आओ हम सब झूला झूलें .
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें ..

हैं बहार सावन की आई .

देखों श्याम घटा नभ छाई ..
अब फुहार पड़ती है भाई .
ठंडी – ठंडी अति सुखदायी ..
आओ हम सब झूला झूलें .
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें ..

कुहू – कुहू कर गाने वाली .
प्यारी कोयल काली – काली .
बड़ी सुरीली भोली – भाली .
गाती फिरती है मतवाली .
हम सब भी गाकर झूलें .
पेंग बढ़कर नभ को छूलें ..

मोर बोलता है उपवन में .
मस्त हो रहा है नर्तन में ..
चातक भी बोला वन में .
आओ हम सब झूला झूलें .
पेंग बढ़कर नभ को छूलें ..

pulkit khandelwal: