जय बोलो प्यारे हिंदुस्तान की

एक बार फिर से जय बोलो ,
प्यारे हिंदुस्तान की .

जिसकी मिट्टी सोना देती ,
धरती है भगवान् की .
दया – धर्म की शिक्षा मिलती ,
जन्म भूमि इंसान की .
गाँव गाँव में नदियाँ बहती ,
ज्वाला जलती मान की .
गीतों की फुलझरियां हँसती ,
बढ़ी शान ईमान की .
एक बार फिर से जय बोलो ,
प्यारे हिंदुस्तान की .

जहाँ चमन है बाग़ बगीचा ,
बियाबान खलिहान भी .
ऊँचा पर्वत चौड़ी खायी ,
जल थल है गतिवान भी .
एक बार फिर से जय बोलो ,
प्यारे हिंदुस्तान की .

pulkit khandelwal: